छप-छप की झंकार में सब कुछ भूल जाएँ कुछ पल के लिए ही सही छप-छप की झंकार में सब कुछ भूल जाएँ कुछ पल के लिए ही सही
उसमें नवयौवन की नई तरंग दे जाऊँ कुछ बरसात के पल को जीत जाऊँ। उसमें नवयौवन की नई तरंग दे जाऊँ कुछ बरसात के पल को जीत जाऊँ।
किधर खो गए मेरे प्यारे वो बचपन के पल गिन गिन। किधर खो गए मेरे प्यारे वो बचपन के पल गिन गिन।
कुछ खट्टी - कुछ मीठी वार -सोमवार चलो सुनाऊँ बचपन की वो प्यारी बातें कुछ खट्टी - कुछ मीठी वार -सोमवार चलो सुनाऊँ बचपन की वो प्यारी बातें
बरसात वही थमी सी है बेबस गर्मियाँ बहा के। बरसात वही थमी सी है बेबस गर्मियाँ बहा के।
एक इतिहास बनकर मैं भी लौट जाऊंगी एक दिन एक इतिहास बनकर मैं भी लौट जाऊंगी एक दिन